कलानिधि फेल, दीपक कुमार को लखनऊ पुलिस की कमान मिलेगी

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लखनऊ। लगभग 14 महीनो तक लखनऊ की सफलता पूर्वक कमान सम्भालने वाले लखनऊ के पूर्व एसएसपी दीपक कुमार की लखनऊ मे वापसी के कयास लगाए जा रहे है। दीपक कुमार के कार्यकाल मे भी अपराध की बड़ी घटनाए घटित हुई लेकिन पुलिस विभाग मे तालमेल बैठाने के बेहतरीन हुनर मन्द माने जाने वाले दीपक कुमार को लखनऊ यूनिवर्सिटी मे हुए बवाल के बाद लखनऊ की कप्तानी से हाथ धोना पड़ा था।

लेकिन अब जब गुपचुप तरीके से उनकी लखनऊ की कुर्सी पर वापसी की चर्चाए चल रही है तो कुछ लोग ,ाुश है तो कुछ लोग ऐसे कयासो मे सच्चाई देख कर कह रहे है कि आग के बिना धुआॅ नही निकलता है कुछ लोगो मे चर्चा अब तेज होती जा रही है कि किसी भी समय दीपक कुमार रिटर्न हो सकते है।

लेकिन ऐसी खबरे ज्यादातर क्यास ही साबित होकर रह जाती है। हम इस खबर की पुष्टि नही कर रहे है। दीपक कुमार के तबादले के बाद बरेली जिले की 61 दिनो की कप्तानी पारी खेलने वाले कलानिधि नैथानी को लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण जिले का चार्ज मिला उन्होने चार्ज सम्भालते ही नित नये आदेश जारी करना शुरू कर दिए और पुलिस के पूरे अमले को वाहन चेकिग मे लगा दिया लेकिन उनके चार्ज सम्भालने के बाद सिर्फ एक बदमाश ने हाई सिक्योरिटी जोन मे राजभवन के पास कैशवैन के गार्ड की गोली मार कर हत्या ड्राईवर को गोली मार कर घायल कर लाखो रूपए की लूट की सनसनीखेज घटना को अन्जाम दे दिया ।

इस चुनौतीपूर्ण घटना के खुलासे के लिए एसएसपी कलानिधि नैथानी ने जीजान लड़ा दी और महज एक सप्ताह के अन्दर ही आरोपी विनीत और उसके जीजा को गिरफ्तार कर वारदात का खुलासा कर दिया लेकिन कलानिधि नैथानी की मुशकिले यही कम नही हुई। इस घटना के खुलासे के बाद मीडिया और जनता का ध्यान अपराध की घटनाओ से कम हुआ तो 29 सितम्बर की रात गोमती नगर थाने मे तैनात सिपाही द्वारा जिस घटना को अन्जाम दिया गया उसने तो कलानिधि नैथानी पर सवालो का पहाड़ सा खड़ा कर दिया।

एपल कम्पनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या सिपाही प्रशान्त चैधरी द्वारा गोली मार कर की गई जिसकी चश्मदीद गवाह विवेक के साथ मौजूद सना नाम की युवती बनी और इस घटना के बाद बढ़ी एसएसपी की मुशकिले कम होने की बजाए बढ़ती ही गई ।

इससे पहले की लोग इस सनसनीखेज घटना को भूल पाते 5 डकैतो द्वारा पीजीआई क्षेत्र मे व्यापारी मोलीलाल अग्रवाल के घर मे लाखो की डकैती की वारदात को अन्जाम दिया गया लेकिन एसएसपी को यहा मात्र चैबीस घटो के भीतर कामयाबी मिली और वारदात का खुलासा हुआ 5 डकैत पकड़े गए व्यापारियो ने एसएसपी जिन्दाबाद के नारे लगाए।

लेकिन पुलिस की ये खुशी भी अपराधियो से देखी नही गई और तीन अक्टूबर की रात ठाकुरगंज मे दो सगे भाईयो इमरान गाजी और अरमान गाजी की गोली मार कर हत्या कर दी गई। पुराने लखनऊ मे हुए इस दोहरे हत्याकाण्ड ने पुलिस की मुसतैदी पर सवालिया निशान लगाए और पुलिस पर आरोप लगा कि थाने से महज पाॅच सौ मीटर की दूरी पर अपराधी आधे घंटे तक दोनो भाईयो को पीटते रहे और पुलिस को कानो कान खबर नही हुई ।

दोहरी हत्या के बाद एसएसपी की मुशकिले बढ़ी और तीन नामजद आरोपियो मे से एक की गिरफ्तारी हुई दो की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी पर जनता के आक्रोष का भारी दवाब बना हुआ है। दोहरे कत्ल की इस वारदात से पहले वजीरगंज की पाडेण्यगंज पुलिस चैकी से महज 200 मीटर की दूरी पर लबे सड़क एक पल्लेदार की चाकू मार कर निर्मम हत्या कर दी गई। ये वारदात भी अभी अनसुलझाी है।

ठाकुरगंज मे हुए दोहरे हत्याकाण्ड के दो दिन बाद ठाकुरगंज क्षेत्र मे ही सरफराजगंज मे जिन्नातो वाली मस्जिद के पास अपनी छत पर रात मे टहल रहे मौलाना मोहम्मद अली अज्ञात रिवाल्वर से चली संदिग्ध गोली से घायल होने से बाल बाल बचे लेकिन उनकी छत पर रख्खी पानी की टंकी के ढक्कन मे छेद हो गया।

विवेक तिवारी हत्याकाण्ड के बाद भाजपा के ही एक दर्जन से ज्यादा विधायको ने एसएसपी को हटाने का सरकार से निवेदन तक कर डाला। एसएसपी कलानिधि नैथानी पर झूठ बोलने का आरोप तब लगा जब उन्होने अपने आवास पर दोपहर सवा बारह बजे आरोपी सिपाही प्रशान्त चैधरी को गिरफ्तार कर लिए जाने की बात मीडिया से कही लेकिन उनका ये बयान उस समय झूठा साबित हुआ जब साढ़े तीन घंटे के बाद आरोपी सिपाही अपनी सिपाही पत्नी राखी मलिक के साथ मृतक विवेक तिवारी के खिलाफ ही मुकदमा लिखवाने के लिए तहरीर लेकर थाने पहुॅचा और हंगामा किया।

घटनाए एसएसपी दीपक कुमार के कार्यकाल मे भी हुई लेकिन घटनाओ के बावजूद पुलिस विभाग या जनता मे उनकी लोकप्रियता मे कोई कमी नही आई । वि0वि0 मे हुई घटना के बाद जब दीपक कुमार के तबादले की खबर आई तो पुलिस विभाग मे भी मायूसी छा गई यही नही उनके कार्यो से मुतमईन जनता मे भी अफसोस देखने को मिला और उनकी जब विदाई हुई तो कुछ लोग तो फूट फूट कर रोए भी लेकिन दीपक कुमार ने अपने चाहने वालो को ये कह कर तसल्ली दी की ट्रांसफर तो पार्ट आफ दी जाब है।

लेकिन अब लखनऊ के थानो पर चैराहो पर बैठ कर डियूटी दे रहे सिपाहियो मे चर्चा चल रही है कि दीपक कुमार को दोबारा लखनऊ लाया जा सकता है। हालाकि ऐसी कोई सुगबुगाहट अभी तक मीडिया मे आम नही हुई है लेकिन ऐसी चर्चाओ का बाजार गर्म है कि दीपक कुमार एक बार फिर लखनऊ की कमान सम्भाल सकते है ऐसी भी चर्चा है।

कि कलानिधि नैथानी के सीनियर दीपक कुमार को सिर्फ लखनऊ की जनता और पुलिस प्रशासन ही नही बल्कि शासन भी दोबारा उनहे लखनऊ की कमान सौपने की तैय्यारी का मन बना रहा है। अब देखना ये है कि ये सिर्फ अटकले ही साबित होती है या फिर ये सिर्फ कयास ही बन कर रह जाएगा।

दीपक कुमार के तबादले के बाद लखनऊ के एसएसपी बने कलानिधि नैथानी को वैसे तो अपराधियो ने खूब चुनौती दी लेकिन विवेक तिवारी हत्याकाण्ड के बाद जो सबसे बड़ी चुनौती सामने आई वो चुनौती लखनऊ तक सीमित नही रही बल्कि ये समस्या प्रदेश के अन्य जिलो तक फैल गई। इस हत्याकाण्ड मे आरोपी बने सिपाही प्रशान्त चैधरी की गिरफ्तारी के बाद बड़ी सख्या मे सिपाही विद्रोह की भूमिका मे आ गए और नौबत यहा तक आ गई कि पुलिस थानो के साथ साथ एसएसपी के आफिस मे पुलिस कर्मी विरोध स्वरूप काली पटटी बाघं कर काम करते हुए पाए गए । सरकार और पुलिस विभाग को परेशान करने वाली अनुशासनहीनता की ऐसी खबरे प्रदेश के कई जिलो से मिली तो कई पुलिस कर्मियो पर निलम्बन का डंडा अनुशासनहीनता करने के लिए चलाया गया।

पुलिस विभाग मे अनुशासनहीनता और विरोध की शुरूआत तो कलानिधि नैथानी की कप्तानी वाले शहर लखनऊ से हुई थी गोमती नगर थाने मे विवेक तिवारी हत्या मे आरोपी बनाए गए सिपाही प्रशान्त चैधरी और उसकी सिपाही पत्नी ने आला अफसरो के सामने अनुशासनहीनता की हदे पार की थी इस लिए उन पर कार्यवाही की तलवार लटकने की खबरे चैकाने वाली खबरे नही हो सकती है।

अति संवेदनशील माने जाने वाले पुराने लखनऊ मे 19वी रमजान की सुबह ग्लीम का ताबूत निकलने की तैय्यारी थी और पुराने लखनऊ मे सुरक्षा का घेरा तैय्यार था जुलूस से कुछ घंटे पहले सआदतगंज के तोप दरवाजे के पास कलीम नाम के एक युवक की गली मे दौड़ा दौड़ा कर चाकुओ से गोद कर निर्मम हत्या कर दी गई थी । जुलूस से पहले हुई इस सनसनी खेज घटना की खबर पुराने लखनऊ मे जगंल की आग की तरह फैल गई और अफवाहो का बाजार ऐसा गर्म हुआ जिसे तुरन्त ठन्डा करना टेढ़ी खीर थी ।

तब निवर्तमान एसएसपी दीपक कुमार ने इस चुनौती पूर्ण घटना को अपने स्तर से सम्भाला और दो लोगो को तुरन्त गिरफ्तार कर घटना का विरोध करने वालो के मुंह बन्द कर दिए और जुलूस को शान्तीपूर्ण और बाधा रहित माहौल मे सम्पन्न कराने मे वो कामयाब हुए।

आईपीएस अधिकारी दीपक कुमार तनाव पूर्ण माहौल को शान्तीपूर्ण माहौल मे बदलने मे मास्टर माने जाने लगे और उनकी लोकप्रियता दिन पे दिन बढ़ती चली गई लेकिन वि0वि मे हुए बवाल की गाज उन पर गिरी और उन्हे लखनऊ की कप्तानी से हाथ धोना पड़ा।

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