कानपुर: साथियों सहित संदिग्ध बांग्लादेशी पर दर्ज हुई FIR

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कानपुर। मस्जिद में इमाम पद को लेकर शुरू हुए विवाद में एक इमाम पर बांग्लादेशी होने के आरोप लगे हैं। मामला कोर्ट पहुंचा तो विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्ञानेंद्र सिंह ने आरोपित इमाम पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। कैंट पुलिस ने संदिग्ध बांग्लादेशी समेत सात लोगों पर फर्जी दस्तावेज बनाने, सही बता कर इस्तेमाल करने, धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने चकेरी के आमिर हसन को छोटी बीबी का हाता स्थित मस्जिद में सचिव नियुक्त किया था। इसी मस्जिद में जुल्फिकार अली भी इमाम नियुक्त हुए। अधिवक्ता जयंत जायसवाल के मुताबिक आमिर को जब इमाम के बांग्लादेशी होने की जानकारी हुई तो वह कल्याणपुर स्थित मस्जिद पहुंचे जहां पर जुल्फिकार पूर्व में इमाम थे। वहां जांच पड़ताल की तो जुल्फिकार की कई ऐसी हरकतों का पता चला जो संदिग्ध थीं।

आमिर ने उन्हें इमाम पद से हटाकर तहसीन रजा को नियुक्त कर दिया और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद विवाद शुरू हो गया। अधिवक्ता के मुताबिक जुल्फिकार ने अपने साथियों की मदद से नए इमाम को मस्जिद में घुसने नहीं दिया। मस्जिद की संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश की। इसके बाद आमिर कोर्ट गए और जुल्फिकार पर बांग्लादेशी होने समेत कई गंभीर आरोप लगाए।

करीब डेढ़ माह की सुनवाई के बाद अदालत भी उनके तर्कों से सहमत थी। प्रथम दृष्ट्या आरोपों को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने मुकदमे के आदेश दिए थे। कैंट पुलिस ने जुल्फिकार और उसका साथ देने के आरोप में साहिबे, जाहिद हुसैन, परवेज, खुर्शीद खां, हाजी इकबाल और शब्बीर हसन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

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